वंदे मातरम के 150 वर्ष: संसद में आज होगी 10 घंटे की ऐतिहासिक बहस, पीएम मोदी और विपक्ष आमने-सामने

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद का शीतकालीन सत्र आज बेहद अहम होने वाला है। लोकसभा में सोमवार को इस विषय पर विशेष और संक्षिप्त बहस होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं हिस्सा लेने वाले हैं। सरकार इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति में है, जिससे सदन में तीखी बहस के आसार हैं।

 

लोकसभा में 10 घंटे की बहस, विपक्ष करेगा शुरुआत

 

वंदे मातरम पर आज होने वाली चर्चा के लिए लोकसभा में 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। विपक्ष की ओर से बहस की शुरुआत कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी करेंगी। कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण बहस के लिए अपने प्रमुख वक्ताओं के रूप में दीपेंद्र हुड्डा, बिमोल अकोइजाम, प्रणीति शिंदे, प्रशांत पडोले, किरण चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत को शामिल किया है।

बहस में वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व, इसके विभिन्न संस्करणों, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और समय-समय पर हुए विवादों पर विस्तृत चर्चा होगी।

 

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 7 नवंबर को वंदे मातरम के 150वें वर्ष समारोह का शुभारंभ करते हुए कुछ छंद हटाए जाने के मुद्दे को उठाया था, जिसके बाद से यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद गर्म है।

 

राज्यसभा में अमित शाह करेंगे सरकार का नेतृत्व

 

वंदे मातरम पर राज्यसभा में मंगलवार को चर्चा होगी, जिसका नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। उनके बाद स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा अपनी बात रखेंगे।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सरकार पर पलटवार करते हुए अपनी बात रखेंगे। दोनों सदनों में यह बहस राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है।

 

संसदीय बुलेटिन से बढ़ा विवाद

 

हाल ही में जारी एक संसदीय बुलेटिन में सदन की कार्यवाही के दौरान “धन्यवाद”, “जय हिंद” और “वंदे मातरम” जैसे नारे लगाने पर रोक संबंधी नियम दोहराए गए। इसके बाद विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए और इसे वंदे मातरम के प्रति दोहरे रवैये से जोड़ दिया।

 

बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना फिर चर्चा में

 

‘वंदे मातरम’ साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1870 के दशक में रचित राष्ट्रगीत है, जिसने आज़ादी के आंदोलन में राष्ट्रवादी भावनाओं को नई दिशा दी थी। 150 वर्ष पूरे होने के इस अवसर पर यह गीत एक बार फिर संसद के केंद्र में है जहां इसके ऐतिहासिक गौरव के साथ-साथ राजनीतिक मतभेद भी सामने आ रहे हैं।

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