मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को PG एडमिशन में बोनस अंक नहीं: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत चिकित्सकों द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एमडी और एमएस में प्रवेश के दौरान बोनस अंक देने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेजों में दी जा रही सेवा को अनुसूचित क्षेत्र सेवा नहीं माना जाएगा, इसलिए चिकित्सक बोनस अंक के पात्र नहीं हैं।

जानकारी के मुताबिक, राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थित मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत आधा दर्जन से अधिक जूनियर रेजिडेंट और डेमोंस्ट्रेटर डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चूंकि उनके मेडिकल कॉलेज अनुसूचित क्षेत्रों में आते हैं, इसलिए उन्हें प्रत्येक सेवा वर्ष पर 3 प्रतिशत बोनस अंक मिलना चाहिए।

डॉक्टरों ने यह भी आरोप लगाया था कि मेडिकल शिक्षा विभाग ने उनके सेवा प्रमाण पत्र में उनकी नियुक्ति को गैर-अनुसूचित क्षेत्र सेवा के रूप में दर्ज किया है, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने PG प्रवेश प्रक्रिया में बोनस अंक प्रदान करने की मांग की थी।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता कार्यालय के लॉ अफसरों ने तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण चिकित्सा कोर में केवल जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) को शामिल किया गया है। मेडिकल कॉलेज तथा उनसे संबद्ध अस्पताल इस सूची का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें सामान्य श्रेणी में माना जाता है। इस कारण से PG में बोनस अंक देने का प्रावधान लागू नहीं होता।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज ग्रामीण चिकित्सा कोर के दायरे से बाहर हैं, इसलिए मेडिकल कॉलेजों में सेवा देने वाले चिकित्सक PG एडमिशन में बोनस अंक की पात्रता नहीं रखते।

अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि बोनस अंक का लाभ केवल उन्हीं चिकित्सकों को दिया जा सकता है जो वास्तव में ग्रामीण और अनुसूचित क्षेत्रों की सूची में आने वाले स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा दे रहे हैं।

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