रायपुर में लिफ्ट दुर्घटना टली: इंद्रप्रस्थ फेज-2 में लिफ्ट अचानक आठवीं मंजिल से टकराई, मेंटेनेंस की बड़ी लापरवाही उजागर
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रायपुर। राजधानी रायपुर के डीडीनगर क्षेत्र स्थित हाउसिंग बोर्ड के आवासीय कॉम्पलेक्स इंद्रप्रस्थ फेज-2 में सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया। ग्राउंड फ्लोर पर लिफ्ट का बटन दबाने वाली एक महिला सेकंड फ्लोर तक जाने की तैयारी में थी, लेकिन तभी लिफ्ट का ग्रिल गेट पूरी तरह खुलने से पहले ही लिफ्ट अचानक चल पड़ी और तेज रफ्तार से सीधे आठवीं मंजिल से टकरा गई। सौभाग्य से महिला लिफ्ट में सवार नहीं हो सकी, जिससे बड़ा हादसा होते–होते बच गया।
घटना के बाद रहवासियों में हड़कंप मचा हुआ है और यह मामला आवासीय इमारतों में लिफ्ट मेंटेनेंस की गंभीर खामियों को उजागर करता है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी रायपुर और भिलाई सहित कई शहरों में लिफ्ट हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान भी हुआ है।
सरकार ने अप्रैल में लिया था बड़ा फैसला, लेकिन अमल कमजोर
लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी साल अप्रैल में लिफ्ट और एस्केलेटर सुरक्षा को लेकर कड़ा निर्णय लिया था। इसके तहत—
सभी लिफ्ट और एस्केलेटर का पंजीकरण अनिवार्य,
नवीनीकरण और निरीक्षण जरूरी,
और संचालन में उच्च सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक किया गया था।
प्रदेशभर में व्यावसायिक–आवासीय भवनों, मॉल्स और मल्टीस्टोरी इमारतों में करीब 1.50 लाख लिफ्ट स्थापित हैं। लेकिन नियम लागू हुए छह महीने हो चुके हैं, फिर भी 95% से अधिक लिफ्टों में न तो विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट चस्पा है और न ही आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर।
यह स्थिति गंभीर है, क्योंकि लिफ्ट खराब होने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा अनिश्चित बनी रहती है। लोक सेवा गारंटी में सेवाओं को शामिल किए जाने के बावजूद दुर्घटना का खतरा कम होता नजर नहीं आ रहा।
नियमित जांच और निगरानी पर जोर आवश्यक
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षा नियम सिर्फ कागज़ों में न रह जाएं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू हों।
विभागीय टीमें नियमित निरीक्षण करें,
औचक जांच की व्यवस्था हो,
और भवन मालिकों से हर छह महीने या सालभर में ऑनलाइन मेंटेनेंस स्व-घोषणा पत्र भरवाया जाए।
आखिर सवाल लोगों की जान-माल की सुरक्षा का है और ढिलाई किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
