हाथियों का कहर: जटगा रेंज में 65 हाथियों ने दो गांवों को घेरा, DFO ने रातभर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

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रायपुर। जटगा रेंज के वनग्राम भंवरकछार और झुमकीडीह में गुरुवार की रात रोमांच और दहशत से भरी रही। अंधेरी रात, कड़ाके की ठंड और 65 हाथियों के विशाल झुंड ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी। जैसे ही हाथियों ने गांव को चारों तरफ से घेरना शुरू किया, ग्रामीण दहशत में घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे। सूचना मिलते ही डीएफओ कुमार निशांत वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और रातभर ऑपरेशन में डटे रहे।

 

65 हाथियों का दल लगातार जंगल और गांव की सीमाओं में घूम रहा:-

 

डीएफओ ने बताया कि इन दिनों जटगा रेंज में करीब 65 हाथियों का दल सक्रिय है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल ने हाथियों को गांवों की ओर आकर्षित किया है। यही नहीं, जिन किसानों ने फसल की मिंसाई कर ली है और धान घरों में सुरक्षित रखा हुआ है, हाथी रात के समय मिट्टी के मकानों को तोड़कर अंदर रखे धान तक पहुँच जाते हैं। इससे जान-माल की हानि की आशंका बनी रहती है।

 

रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन:-

वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर दो मोर्चों पर काम शुरू किया—

1. हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ना

2. ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना

टार्च की रोशनी, जिप्सी के तेज हूटर और वन कर्मियों की हकलाहट वाली आवाजों की गूंज ने कड़कड़ाती ठंड में भी ऑपरेशन को संभव बनाया। करीब 3 से 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने में सफलता मिली।

 

ग्रामीणों को अस्थायी शरण स्थल में रखा गया:-

हाथियों के फिर से गांव लौटने की आशंका को देखते हुए दोनों गांवों के ग्रामीणों को सुरक्षित ठिकानों पर ठहराया गया है। डीएफओ ने बताया कि हाथियों की मूवमेंट पूरी तरह जंगल की ओर होने की पुष्टि के बाद ही ग्रामीणों को वापस गांव भेजा जाएगा।

 

हाथी मित्र दल सक्रिय:-

हाथियों को सुरक्षित रास्ते की ओर मोड़ने और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए हाथी मित्र दल बनाया गया है। डीएफओ ने बताया कि ग्रामीणों और मित्र दल के सहयोग से अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है। लक्ष्य यही है कि

न तो हाथियों को नुकसान हो और न ही ग्रामीणों को।

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