बिलासपुर में 9वीं की छात्रा ने की आत्महत्या: मारपीट, अपमान और जांच में शिक्षक दोषी पाए गए, FIR दर्ज

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बिलासपुर। रतनपुर क्षेत्र के ग्राम नेवसा में निजी स्कूल की 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 वर्षीय छात्रा पूनम रजक ने सितंबर में अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा को स्कूल में बुरी तरह पीटा गया, उसके साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिससे आहत होकर उसने कदम उठाया।

मारपीट का आरोप, प्राचार्य के पति ने स्कूल में की अभद्रता:-

22 सितंबर को पूनम जब स्कूल पहुंची, तो स्कूल की प्राचार्या के पति ने उस पर 11वीं कक्षा के छात्र से दोस्ती करने का आरोप लगाया। आरोप के बाद उन्होंने छात्रा को पूरे स्कूल के सामने घसीटकर मारपीट की। घटना के दौरान प्राचार्या मौके पर मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया।

सरकारी शिक्षक रमेश साहू की संदिग्ध भूमिका:-

घटना के समय सरकारी स्कूल के शिक्षक रमेश साहू भी मौके पर मौजूद थे। जांच में सामने आया कि रमेश साहू का भाई उसी निजी स्कूल का संचालक है, जहां उसकी पत्नी प्राचार्या हैं।

चौंकाने वाली बात यह रही कि साहू सरकारी स्कूल में उपस्थित ही नहीं रहते थे और अपना अधिकांश समय इसी निजी स्कूल में बिताते थे।

 

जांच में पुष्टि, शिक्षक निलंबित:-

डीईओ द्वारा की गई जांच में सीसीटीवी फुटेज और अन्य छात्रों के बयानों से मारपीट की पुष्टि हुई। इसके बाद शिक्षक रमेश साहू को निलंबित कर दिया गया।

 

पुलिस ने दो महीने बाद FIR दर्ज की:-

परिजनों ने शुरुआत से ही स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन पुलिस दो महीने तक मर्ग जांच के नाम पर मामला आगे बढ़ाती रही।

शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के बाद अंततः पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और मारपीट की धाराओं में FIR दर्ज की।

फिर भी आश्चर्यजनक रूप से आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नाम सामने आने पर आरोपी फरार हो सकता है। गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है।

 

मानसिक दबाव बना आत्महत्या की वजह:-

परिजनों और सहपाठियों के अनुसार, स्कूल में हुई मारपीट, अपमान और लगातार प्रताड़ना से पूनम मानसिक रूप से बेहद कमजोर हो गई थी। घर लौटते ही शाम 5 बजे उसने अपनी जान दे दी।

 

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल:-

एक छात्रा की मौत ने स्कूलों में बच्चों की मानसिक सुरक्षा, अनुशासन के नाम पर की जाने वाली हिंसा और सरकारी शिक्षक की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और पुलिस की ढिलाई ने भी मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

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