10 साल की सेवा पर ग्रेडेशन मांगने वाले शिक्षकों को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने 1880 याचिकाएं खारिज कीं
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन शिक्षकों को बड़ा झटका दिया है, जिन्होंने 10 साल की सेवा पूर्ण होने के बाद क्रमोन्नति (ग्रेडेशन) का लाभ देने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के ढाई लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे।
जस्टिस एन.के. व्यास की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि संविलियन से पहले शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन नहीं थे। वे पंचायत विभाग के कर्मचारी थे, इसलिए संविलियन से पहले की सेवा अवधि को ग्रेडेशन के लिए नहीं गिना जा सकता।
गौरतलब है कि पंचायत विभाग में नियुक्त वर्ग–1, 2 और 3 के शिक्षाकर्मियों का शिक्षा विभाग में संविलियन हुआ, जिसके बाद उन्हें सहायक शिक्षक एलबी, शिक्षक एलबी और व्याख्याता एलबी के पदनाम दिए गए। हालांकि, इनके लिए क्रमोन्नति का लाभ लंबे समय से रुका हुआ था, जिसके खिलाफ कुल 1188 शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
शिक्षकों का तर्क था कि 10 साल की सेवा पूरी होने पर वे 2017 के सरकारी आदेश के अनुसार ग्रेडेशन के पात्र हैं, लेकिन विभाग ने आदेश लागू नहीं किया। उन्होंने अपने पक्ष में सोना साहू केस का हवाला भी दिया।
राज्य सरकार का पक्ष:-
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि याचिकाकर्ता शिक्षाकर्मी पहले पंचायत राज अधिनियम 1993 के अंतर्गत नियुक्त थे और उनकी सेवा जनपद पंचायत के अधीन थी। इसलिए संविलियन से पहले वे राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी नहीं माने जा सकते।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा—
10 मार्च 2017 के सर्कुलर में ग्रेडेशन के लिए जो शर्तें तय हैं, वे शिक्षाकर्मी पूरी नहीं करते।
इनकी सेवा अवधि केवल 1 जुलाई 2018, यानी संविलियन की तारीख से ही मानी जाएगी।
इसलिए वे 10 वर्ष की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं कर पाए हैं।
सोना साहू केस की परिस्थितियाँ अलग थीं, इसलिए उसे आधार नहीं बनाया जा सकता।
इस आधार पर कोर्ट ने 1880 शिक्षकों की याचिका खारिज कर दी।
