बिलासपुर में 40 लाख की ठगी का खुलासा: मकान बेचने के नाम पर फर्जी इकरारनामा, SECL कर्मचारी सहित दो गिरफ्तार
Share this
बिलासपुर। बिलासपुर में मकान बेचने के नाम पर 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एसईसीएल कोरबा में पदस्थ कर्मचारी ने अपने साथी के साथ मिलकर एक व्यक्ति को फर्जी इकरारनामा बनवाकर मोटी रकम ऐंठ ली। पीड़ित की शिकायत पर सरकंडा पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सूर्या विहार सरकंडा निवासी अजीत शुक्ला ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़ित ने बताया कि उसकी पहचान दिनेश प्रताप सिंह नामक व्यक्ति से थी, जिसके जरिए उसकी मुलाकात अप्रैल 2024 में भास्कर प्रसाद त्रिपाठी से हुई। मुलाकात के दौरान भास्कर त्रिपाठी ने स्वयं को SECL कोरबा का कर्मचारी बताते हुए विवेकानंद नगर, मोपका में स्थित एक मकान को बेचने की बात कही।
मकान देखने के बाद अजीत शुक्ला ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई। इसके बाद 26 अप्रैल 2024 को 50 रुपए के स्टाम्प पेपर पर एक इकरारनामा तैयार किया गया, जिसमें 3 महीने के भीतर रजिस्ट्री कराने का उल्लेख था। इस दस्तावेज़ पर दिनेश प्रताप सिंह और अरुण सिंह ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए।
समझौते के बाद अजीत शुक्ला ने भास्कर त्रिपाठी को ऑनलाइन 36 लाख रुपए दे दिए। लेकिन तीन माह बीतने के बावजूद भास्कर ने मकान की रजिस्ट्री नहीं कराई। समय सीमा समाप्त होने पर जब अजीत ने रजिस्ट्री की मांग की, तब आरोपियों ने 40 लाख रुपए का एक और फर्जी इकरारनामा तैयार कर दिया।
इसी दौरान पीड़ित को पता चला कि भास्कर त्रिपाठी का वह मकान पहले से ही बैंक में बंधक है। आरोप है कि मकान की वास्तविक स्थिति छिपाकर और बिना नामांतरण कराए आरोपियों ने बिक्री का फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर मोटी रकम हड़प ली।
पीड़ित की रिपोर्ट के बाद सरकंडा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए
भास्कर प्रसाद त्रिपाठी (SECL कर्मचारी)
और
दिनेश प्रताप सिंह (सहयोगी)
को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
