नक्सलवाद का अंत? MMC जोन कमेटी ने सरकार से मांगी मोहलत, हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का संकेत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में नक्सलवाद लगभग सिमटता हुआ दिखाई दे रहा है। बीते वर्षों में माओवादी संगठन के कई बड़े नेताओं ने या तो आत्मसमर्पण किया या सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ढेर हुए। अब जंगलों में बचे हुए माओवादी भी यह महसूस करने लगे हैं कि सरकार, देश और सुरक्षा बलों के खिलाफ उनकी सशस्त्र लड़ाई ज्यादा समय तक नहीं चल सकती। ऐसे में वे मुख्यधारा में लौटने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेने की दिशा में झुकते दिख रहे हैं।

इसका बड़ा संकेत नक्सलियों के मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ (MMC) स्पेशल जोनल कमेटी की तरफ से जारी ताजा प्रेसनोट में दिखाई दिया है। यह पत्र तीनों ही राज्यों — मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ — के मुख्यमंत्रियों को संबोधित है। इसे संगठन के प्रवक्ता अनंत की ओर से जारी किया गया है।

क्या लिखा है माओवादी प्रवक्ता ने?

प्रवक्ता अनंत ने अपने पत्र में लिखा:

“मैं अनंत, MMC जोन के प्रवक्ता के तौर पर तीनों राज्य सरकारों को निवेदन पत्र भेज रहा हूं। हाल ही में हमारी पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य कॉम्रेड सोनू दादा ने बदलती परिस्थितियों को देखते हुए हथियार त्यागकर सशस्त्र संघर्ष को अस्थाई रूप से विराम देने का निर्णय लिया है। CCM सतीश दादा के बाद अब कॉम्रेड चंद्रन्ना ने भी इस निर्णय का समर्थन किया है। हम MMC स्पेशल जोन कमेटी भी हथियार छोड़कर सरकार की पुनर्वास योजना स्वीकार करना चाहती है।”

अनंत ने आगे कहा कि इस सामूहिक निर्णय पर पहुंचने के लिए संगठन को थोड़ा समय चाहिए, क्योंकि नक्सली संगठन जनवादी केंद्रीयता के सिद्धांत पर चलता है। उन्होंने सरकार से 15 फरवरी 2026 तक का समय देने का अनुरोध किया है।

“हमारा कोई छुपा एजेंडा नहीं” — अनंत

पत्र में अनंत ने लिखा:

“इतना समय मांगने के पीछे कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है। हमारे पास तेज संचार के साधन नहीं हैं, इसलिए अपने साथियों तक संदेश पहुंचाने में वक्त लगता है।”

 

अभियान रोकने की अपील:-

अनंत ने तीनों राज्यों की सरकारों से सुरक्षा बलों के अभियान रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि:

 

  • सरकारें PLGA सप्ताह के दौरान भी कोई अभियान न चलाएं
  • मुखबिर गतिविधियों पर रोक लगाएं
  • इनपुट या सूचना के आधार पर मुठभेड़ न करें
  • दोनों पक्ष गतिविधियों को विराम दें

इसके बदले संगठन ने भरोसा दिलाया कि वे भी इस बार PLGA सप्ताह नहीं मनाएंगे और अपनी सभी गतिविधियां रोक देंगे।

‘परिणाम सुखद और सकारात्मक निकलेगा’ — नक्सलियों का दावा:-

प्रवक्ता अनंत ने कहा:

“सरकार ने माओवाद समाप्ति की जो डेडलाइन मार्च 2026 तय की है, उसी समयसीमा के भीतर हम भी सही निर्णय पर पहुंचेंगे। परिणाम सरकार की दृष्टि से सुखद और सकारात्मक होगा।”

 

 

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