सेमरसोत अभ्यारण्य में ‘पुष्पा स्टाइल’ सागौन तस्करी का खेल! रात में कट रही बेशकीमती लकड़ी

Share this

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सेमरसोत अभ्यारण्य क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है। पुष्पा फिल्म की तर्ज पर यहां सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई अपने चरम पर पहुंच गई है। फर्क बस इतना है कि फिल्म में चंदन की तस्करी दिखाई गई थी, जबकि यहां असल जंगलों को बेशकीमती सागौन माफिया निगल रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल से दातुन तक लाने की अनुमति नहीं दी जाती, लेकिन रात होते ही बड़े-बड़े पेड़ों को गिराकर तस्कर खुलेआम लकड़ी निकाल ले जाते हैं—और वन विभाग खामोश है।

कंडा गांव में आधुनिक मशीनों से कट रहे सागौन के पेड़:-

सेमरसोत अभ्यारण्य के कंडा गांव के गहरे जंगलों से घोर अवैध कटाई की तस्वीरें सामने आई हैं।

रात के अंधेरे में हाई-टेक मशीनों से पेड़ काटे जा रहे हैं

कटे पेड़ों के ठूंठ गवाही दे रहे हैं कि तस्करी बड़े स्तर पर है

ग्रामीण कहते हैं—“हमने सालों जंगल बचाया, पर अब माफिया उजाड़ रहे हैं”

गांव में बिजली जैसी मूल सुविधाएं तक नहीं, लेकिन जंगल लूटने वाले बेखौफ हैं

ग्रामीणों का आरोप: दातुन पर रोक, पर लकड़ी तस्करी पर चुप्पी!

ग्रामीणों ने वन विभाग के दोहरे रवैये पर बड़ा सवाल उठाया है।

साधारण दातुन लाने पर कार्रवाई

छोटे वनोपज पर रोक

लेकिन बड़े पैमाने पर कटाई पर कोई कार्रवाई नहीं

यह स्थिति इशारा करती है कि या तो विभाग चुपचाप सब कुछ देख रहा है, या फिर खेल में मिलीभगत हो सकती है।

रात में होता है पूरा ऑपरेशन—वनकर्मी पहुंच ही नहीं पाते:-

वनकर्मियों का कहना है कि गांव में सरकारी आवास नहीं है, इसलिए वे रोज मुख्यालय से आना-जाना करते हैं।

वे मानते हैं कि:

लकड़ी कटाई की जानकारी उन्हें है

यह सब रात में होता है

सीमित स्टाफ और दूरी के कारण वे कार्रवाई नहीं कर पाते

यह स्वीकारोक्ति ही बड़े प्रशासनिक सवाल खड़े करती है।

जांचें बनीं, रिपोर्ट बनीं… फिर ठंडे बस्ते में गईं:-

सेमरसोत अभ्यारण्य में अवैध कटाई का यह कोई पहला मामला नहीं है।

पहले भी जांच कमेटियां बनीं

रिपोर्ट तैयार हुई

मगर नतीजा—शून्य

अधिकारी बदलते गए, पर तस्करी का खेल जस का तस जारी रहा

अब देखना यह है कि क्या इस बार भी मामला ठंडा पड़ जाएगा, या प्रशासन सच में जागेगा।

अब बड़ा सवाल — क्या सेमरसोत अभ्यारण्य सुरक्षित है?

यदि हालात यही रहे,

तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र का वन क्षेत्र कई गुना कम हो सकता है, जैव विविधता खतरे में पड़ सकती है और सागौन के जंगल हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं।

Share this

You may have missed