नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार: 37 सक्रिय नक्सलियों ने हथियार सहित सरेंडर किया, हिड़मा के करीबी भी शामिल

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हैदराबाद। देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ठोस और आक्रामक रणनीति के साथ एंटी-नक्सल ऑपरेशन चला रही हैं। इसी बीच तेलंगाना से बड़ी सफलता मिली है, जहां 37 सक्रिय नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन सभी ने तेलंगाना पुलिस महानिदेशक (DGP) के सामने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया।

सरेंडर करने वालों में संगठन के कई महत्वपूर्ण कैडर शामिल हैं। सबसे चर्चित नामों में कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा के करीबी सहयोगी एर्रा और CPI (माओवादी) के सेंट्रल कमिटी (CC) सदस्य आजाद उर्फ अप्पासी नारायण शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये सभी नक्सली आंध्र–तेलंगाना सीमा और दक्षिण बस्तर इलाके में सक्रिय थे और कई उग्र नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे थे।

हिड़मा की मौत के बाद बढ़ी सरेंडर की रफ्तार:-

हाल ही में सुरक्षा बलों ने आंध्र प्रदेश में कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिड़मा (43) को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। हिड़मा माओवादी संगठनों के भीतर सबसे खतरनाक और कुख्यात चेहरा था, जिस पर कम से कम 26 बड़े हमलों का मास्टरमाइंड होने का आरोप था।

वह 2013 के दरभा घाटी नरसंहार और 2017 के सुकमा हमले का मुख्य आरोपी था।

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में पैदा हुआ हिड़मा PLGA बटालियन नंबर-1 का प्रमुख था और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे कम उम्र का सदस्य भी था।

हिड़मा की मौत के बाद नक्सल संगठन की कमर टूटी है और कई कैडर लगातार आत्मसमर्पण कर रहे हैं। तेलंगाना में हुए इस सामूहिक सरेंडर को नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी जीत माना जा रहा है।

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