CG Silver Festival: पंडवानी की वो आवाज़, जिसने परंपरा की सीमाएं तोड़ीं- PM मोदी ने पूछा हालचाल…NV News

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रायपुर/(CG Silver Festival): छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अवसर पर शनिवार को रायपुर पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी ने देश की प्रसिद्ध लोक कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई से फोन पर बात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। पीएम मोदी ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उनके योगदान को भारतीय लोककला की आत्मा बताया।

मोदी ने इस अवसर पर पद्म भूषण से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के परिजनों से भी बात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। दोनों ही शख्सियतें छत्तीसगढ़ की माटी से निकलीं वे हस्तियाँ हैं जिन्होंने कला और साहित्य के माध्यम से देश का मान बढ़ाया है।

पंडवानी की पुरुष परंपरा में पहली महिला आवाज़:

दुर्ग जिले के पाटन अटारी गांव में जन्मीं तीजन बाई बचपन से ही पंडवानी कला से प्रभावित थीं। अपने नाना से महाभारत की कथाएँ सुनते-सुनते उन्होंने इन्हें गाना शुरू किया और यही उनकी जीवन-यात्रा बन गई।

पंडवानी सदियों तक पुरुषों के वर्चस्व वाली परंपरा रही, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़कर मंच पर कापालिक शैली में खड़े होकर गायन और अभिनय किया। उनकी दमदार आवाज़, नाटकीय प्रस्तुति और कथा कहने की शैली ने इस लोककला को नई ऊंचाइयाँ दीं।

उन्होंने न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई मंचों पर महाभारत की कथा गाकर भारतीय लोककला को सम्मान दिलाया। तीजन बाई कहती हैं, “जैसे बच्चा मां को पकड़कर रखता है, वैसे ही मैंने पंडवानी को पकड़ रखा है। यही मेरा बेड़ा पार लगाएगी।”

इंदिरा गांधी भी बनीं प्रशंसक:

तीजन बाई की असाधारण प्रतिभा को पहचानने वाले नाट्य निर्देशक हबीब तनवीर थे। उन्हीं की पहल पर उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति का अवसर मिला। प्रस्तुति के बाद इंदिरा गांधी ने कहा, “आप बहुत अच्छा महाभारत करती हैं।”

इस पर तीजन बाई ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था-“महाभारत नहीं करती हूं, महाभारत की कथा सुनाती हूं।”उनकी इस विनम्रता और गहराई ने इंदिरा गांधी को गहराई से प्रभावित किया।

बाद में फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ने तीजन बाई को अपने प्रसिद्ध धारावाहिक ‘भारत एक खोज’ में शामिल किया, जिससे पंडवानी पूरे देश के घर-घर तक पहुंची। आज तीजन बाई का नाम सुनते ही पंडवानी की गूंज अपने आप कानों में उतर आती है।

सम्मान और योगदान:

तीजन बाई को उनकी कला के लिए कई बड़े सम्मान मिले-

• पद्मश्री (1988)

• संगीत नाटक अकादमी

• पुरस्कार (1995)

• पद्म भूषण (2003)

• पद्म विभूषण (2019)

उन्होंने दुनिया भर में पंडवानी की प्रस्तुतियाँ दीं और साबित किया कि लोककला किसी एक लिंग या क्षेत्र की सीमाओं में नहीं बंध सकती। उन्होंने मंच पर महिला उपस्थिति को सामान्य बनाया और कई युवा कलाकारों, विशेषकर महिलाओं को इस परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

विनोद कुमार शुक्ल,छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पहचान:

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के परिवार से भी संपर्क किया। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित शुक्ल जी ने अपने लेखन से हिंदी साहित्य को नई संवेदना दी।उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं-‘लगभग जयहिन्द’, ‘नौकर की कमीज़’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी’ और ‘बौना पहाड़’।

निर्देशक मणि कौल ने उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज़’ पर इसी नाम से फिल्म बनाई थी, जबकि निर्देशक अमित दत्ता की फिल्म ‘आदमी की औरत’ को 2009 के वेनिस फिल्म महोत्सव में विशेष सम्मान मिला था।

तीजन बाई- भारतीय संस्कृति की जीवंत आत्मा:

उम्र और बीमारी के बावजूद तीजन बाई का पंडवानी के प्रति प्रेम अटूट है। वे कहती हैं, “पंडवानी मेरे लिए केवल कला नहीं, यह मेरा जीवन है।”

उनकी जीवंतता, सरलता और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें भारत की सांस्कृतिक पहचान बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हालचाल पूछना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस लोकसंस्कृति के प्रति सम्मान है जो भारत की आत्मा को जीवित रखती है।

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