CG High Court:डॉग फीडिंग जोन पर अटका रायपुर निगम, सड़कों पर बड़ा का खतरा अव्यवस्था…NV News

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रायपुर/(CG High Court): सुप्रीम कोर्ट के साफ निर्देशों के बावजूद रायपुर नगर निगम अब तक आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए निर्धारित स्थान तय नहीं कर पाया है। आदेश जारी हुए दो महीने बीत चुके हैं, मगर स्थिति जस की तस है। न तो शहर में डॉग फीडिंग जोन बने हैं और न ही नसबंदी, वैक्सीनेशन या डीवर्मिंग के काम में कोई तेज़ी आई है। नतीजतन, सड़कों और कॉलोनियों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

आदेशों का पालन नहीं, मैदान में बढ़ती अव्यवस्था:

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी, वैक्सीनेशन और डीवर्मिंग कराई जाए और उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाए जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। साथ ही, नगर निगमों को यह भी सुनिश्चित करना था कि कुत्तों को खाना खिलाने के लिए निर्धारित स्थान तय किए जाएं, ताकि सार्वजनिक जगहों पर विवाद या असुविधा न हो।

लेकिन रायपुर नगर निगम इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है। शहर के तेलीबांधा, अमलीडीह, शंकर नगर, देवेंद्र नगर और कबीर नगर जैसे इलाकों में अब भी लोग सड़कों, गेटों और पार्किंग स्थलों पर कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। इससे कई बार झगड़े, ट्रैफिक रुकावट और कुत्तों के झुंड में आक्रामक व्यवहार जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं।

निगम के दावे बनाम हकीकत:

रायपुर नगर निगम का दावा है कि वह नियमित रूप से नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान चला रहा है। निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.के. दीवान का कहना है,“नगर निगम द्वारा नियमित रूप से कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी करने का काम किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भी कार्य जारी है। सामान्य सभा की बैठक के बाद फीडिंग जोन तय करने के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम के ये दावे केवल कागज़ों पर सीमित हैं। न तो सड़कों पर कुत्तों की संख्या कम हुई है और न ही उनके आक्रामक व्यवहार में कोई बदलाव आया है। कई कॉलोनियों में बच्चों और बुजुर्गों को काटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि निगम केवल औपचारिक अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है।

विशेषज्ञों की राय,संतुलन जरूरी:

पशु कल्याण विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानव और पशु दोनों के हित में है। उनका कहना है कि अगर कुत्तों को निर्धारित स्थानों पर भोजन दिया जाए, तो वे संगठित झुंड नहीं बनाएंगे और उनका व्यवहार अधिक शांत रहेगा।

पशु व्यवहार विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी वर्मा बताती हैं, “जब कुत्तों को बिना योजना के खुले में खाना खिलाया जाता है, तो उनमें झुंड मानसिकता विकसित होती है, जिससे वे अधिक आक्रामक हो जाते हैं। तय फीडिंग जोन बनने से न केवल झगड़े और हादसे रुकेंगे, बल्कि कुत्तों का स्वास्थ्य और स्वभाव भी बेहतर होगा।”

उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निगम को हर वार्ड में कम से कम दो से तीन “डॉग फीडिंग जोन” बनाने चाहिए। इन जोनों के रखरखाव में स्थानीय नागरिक समितियों और पशु प्रेमियों को भी शामिल किया जा सकता है, ताकि जिम्मेदारी साझा हो सके।

रायपुर को चाहिए ठोस कार्रवाई, न कि दिखावा:

स्पष्ट है कि रायपुर में आवारा कुत्तों की समस्या केवल प्रशासनिक उदासीनता के कारण बढ़ रही है। अगर नगर निगम समय रहते फीडिंग जोन नहीं बनाएगा और नसबंदी अभियान को तेज नहीं करेगा, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

शहर में साफ-सफाई और सुरक्षा के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि पशु कल्याण के नियमों का पालन ईमानदारी से किया जाए। सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संतुलित शहरी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रायपुर को अब दिखावे की नहीं, जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है। जब तक प्रशासन, नागरिक और पशु प्रेमी एक साथ मिलकर इस समस्या के समाधान की दिशा में काम नहीं करेंगे, तब तक न कुत्तों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और न ही शहरवासियों की।

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