IIT में सिर्फ 20% सीटें लड़कियों को, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा…NV News 

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NV News: देशभर के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) में इस साल लड़कियों की भागीदारी बेहद कम रही है। हाल ही में जारी जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी (JIC) रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 23 आईआईटी में सिर्फ 20.15% सीटें ही लड़कियों को अलॉट हुईं। ये भी मुख्य रूप से सुपर न्यूमरेरी सीटों के तहत दी गईं।

सबसे ज्यादा सीटें IIT तिरुपति में:

अगर सभी आईआईटी (IIT)का डेटा देखें तो लड़कियों को सबसे ज्यादा सीटें आईआईटी तिरुपति में अलॉट हुईं, जहां 21.57% सीटों पर उन्होंने प्रवेश लिया। इसके बाद आईआईटी भिलाई का नंबर आता है, जहां लड़कियों ने 20.24% सीटों पर दाखिला लिया। भिलाई में लड़कियों की कुल 66 सीटें भरी गईं।

वहीं बड़े आईआईटी की बात करें तो आईआईटी खड़गपुर में सबसे ज्यादा यानी 369 सीटें लड़कियों को मिलीं, जो कुल का 19.19% है। इसके अलावा आईआईटी वाराणसी में 318, आईआईटी रुड़की में 278 और आईआईटी बॉम्बे में 267 सीटें अलॉट हुईं।

टॉपर का स्कोर घटा:

रिपोर्ट में परीक्षा परिणाम से जुड़े अहम आंकड़े भी सामने आए हैं। इस साल जेईई एडवांस टॉपर रंजीत गुप्ता (IIT दिल्ली ज़ोन) ने 360 में से 332 अंक हासिल किए। यह स्कोर पिछले साल (355) से कम है।

• 2023 में टॉपर को 341 अंक मिले थे।

• 2022 में टॉपर का स्कोर 314 रहा था।

• यानी तीन साल का ट्रेंड देखें तो टॉपर का स्कोर लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा है।

• टॉप 100 में IIT बॉम्बे का दबदबा।

आईआईटी में दाखिला लेने वाले टॉप रैंकर्स की पहली पसंद हमेशा से ही बड़े आईआईटी रहे हैं। इस साल भी यही पैटर्न देखने को मिला।

• टॉप 100 रैंकर्स में से 73 छात्रों ने IIT बॉम्बे चुना।

• 19 छात्रों ने IIT दिल्ली को तरजीह दी।

• सिर्फ 6 छात्रों ने IIT मद्रास में दाखिला लिया।

अगर सभी रैंकर्स का डेटा देखें तो भी सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स IIT बॉम्बे में गए। इसके उलट, IIT भिलाई में टॉप 5000 रैंकर्स में से सिर्फ 2 छात्रों को ही सीट मिली। वहीं पिछले 3 साल में टॉप 1000 रैंकर्स में से किसी को भी यहां सीट नहीं मिली है।

लड़कों बनाम लड़कियों का अनुपात:

• जेईई एडवांस में इस साल कुल 143810 लड़के और 43413 लड़कियां रजिस्टर्ड हुईं।

• इनमें से 44974 लड़के और 9404 लड़कियां क्वालिफाई हुईं।

• कुल मिलाकर 14524 छात्रों को IIT की 3664 सीटें अलॉट हुईं।

• यानी रजिस्टर्ड छात्रों और अलॉट सीटों के बीच का अंतर करीब 10% ही रहा।

यह आंकड़ा साफ बताता है कि लाखों छात्रों के आवेदन करने के बावजूद बहुत कम को ही IIT में प्रवेश मिल पाता है।

क्यों जरूरी हैं सुपर न्यूमरेरी सीटें?:

IIT में लड़कियों की कम संख्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है। इसी वजह से सुपर न्यूमरेरी सीटें शुरू की गई थीं ताकि अधिक से अधिक लड़कियों को मौका मिल सके। हालांकि रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इन अतिरिक्त सीटों के बावजूद लड़कियों की भागीदारी सिर्फ 20% के आसपास ही है।

JIC रिपोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि IIT में लड़कियों का अनुपात अभी भी बेहद कम है। हालांकि सुपर न्यूमरेरी सीटों से कुछ सुधार हुआ है, लेकिन लंबी दूरी अभी बाकी है। वहीं टॉप रैंकर्स की पहली पसंद अभी भी IIT बॉम्बे, दिल्ली और मद्रास जैसे संस्थान बने हुए हैं। ऐसे में छोटे और नए आईआईटी को भी अपनी गुणवत्ता और आकर्षण बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा।

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