Chhattisgarh news: मजदूरों और बच्चों से बंधुआ मजदूरी का खुलासा, 100 से अधिक मजदूर व 50 बच्चे रेस्क्यू…NV News

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NV News:- खरोरा (छत्तीसगढ़) में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां दो फैक्ट्रियों – मोजो मशरूम फैक्ट्री और उमाश्री राइस मिल – में मजदूरों और बच्चों को बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा था। श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वहां से 100 से अधिक मजदूरों और 50 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया है। इनमें अधिकांश की उम्र 10 से 16 वर्ष के बीच है। सभी को तत्काल सुरक्षा के तहत रायपुर के इनडोर स्टेडियम में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री संचालक नितेश तिवारी, विपिन तिवारी और विकास तिवारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें सुपरवाइजर और पैकेजिंग जैसे कार्यों के लिए बुलाया गया था, लेकिन यहां लाकर बंधक बनाकर जबरन काम कराया गया। पीड़ितों के अनुसार, पिछले पांच महीनों से उन्हें कोई वेतन नहीं मिला है। खाने के नाम पर सिर्फ दो बार – दोपहर तीन बजे और रात दो बजे – बेहद घटिया और कच्चा खाना दिया जाता था।

जब मजदूरों ने इस अमानवीय व्यवहार का विरोध किया, तो उन्हें नशे की दवाइयां देकर शांत कर दिया जाता था। इतना ही नहीं, फैक्ट्री परिसर के अंदर कई मजदूरों के साथ मारपीट किए जाने की भी पुष्टि हुई है। रेस्क्यू किए गए मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे अन्य राज्यों के निवासी हैं, जिन्हें यहां झूठे वादों के साथ काम के बहाने लाया गया था।

कार्रवाई के दौरान जब सभी मजदूरों को इनडोर स्टेडियम में लाया गया, तो फैक्ट्री संचालक और उनके साथी वहां पहुंचे और मजदूरों को पैसा देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करने लगे। लेकिन मौके पर मीडिया की मौजूदगी और अधिकारियों की सतर्कता से उनका प्रयास विफल रहा।

इस पूरी घटना पर बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर मामला है। मैं स्वयं रेस्क्यू टीम का हिस्सा थी। आयोग इसकी गहराई से जांच करेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

श्रम विभाग ने अब इस मामले में सभी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही, बच्चों के पुनर्वास और उनके परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह मामला राज्य में बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और मानवाधिकारों के उल्लंघन का चिंताजनक उदाहरण बनकर सामने आया है, जिस पर सरकार और समाज को मिलकर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

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