पैसो के लिये बेटे ने किया मां का कत्ल,इससे पहले बाप को भी…NV न्यूज़

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NV NEWS-मधेपुरा में पेंशन के लिए बेटे ने मां की गला रेतकर हत्या कर दी. इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है. पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया था. मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है.

यह भी कहा जा रहा है कि पिता की नौकरी का पैसा हड़पने के लिए युवक ने अपने पिता की भी हत्या कर दी थी. उन्हें जेल भी हुई थी. वहीं पुलिस मां की हत्या कर फरार आरोपी को पकड़ने का प्रयास कर रही है.

दरअसल, घटना मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत नदी खादी पंचायत के वार्ड 11 रहटा की है. यहां रहने वाले देवेंद्र यादव पीडब्ल्यूडी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे. देवेंद्र की आठ साल पहले मौत हो गई थी. परिवार को कोष से आठ लाख रुपये मिल चुके थे. पत्नी चिड़ैया देवी को 11 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलने लगी थी.

छोटा बेटा पूरी पेंशन की मांग करता था

मासिक आधार पर पेंशन आने पर चिड़ैया देवी उसे बड़े बेटे शैलेंद्र और छोटे बेटे संतोष में बराबर बांट देती थीं, लेकिन, संतोष उसे पूरी पेंशन देने की बात करता था. इसको लेकर कई बार मां-बेटे में विवाद हो गया.

इसको लेकर बीते शुक्रवार को भी विवाद हुआ था. गुस्से में आकर संतोष ने धारदार हथियार से अपनी मां चिड़िया देवा का गला रेत कर हत्या कर दी. मौके से फरार हो गया. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मृतक मां चिड़ैया देवी ने अपनी कुछ जमीन बड़े बेटे शैलेंद्र व दो बेटियों के नाम पर दी थी. संतोष को यह बात अच्छी नहीं लगी. इसे लेकर वह नाराज भी थे.

पिता को भी मारा गया था

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए मरचुरी भेज दिया. मामले की जानकारी देते हुए एसपी राजेश कुमार ने बताया है कि आरोपी ने भविष्य निधि से मिलने वाली पेंशन के लिए अपनी मां की हत्या कर दी. आरोपी ने 10 साल पहले अपने पिता की हत्या कर दी थी. मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह जेल भी गया था.

चाचा पर जानलेवा हमला हुआ था

बताया गया कि पैसे के लालच में अंधे संतोष ने अपने चाचा पर जानलेवा हमला भी किया था. चाचा के कोई संतान नहीं है. संतोष कहता था कि चाचा अपनी सारी जमीन उसके नाम कर दें. कुछ दिन पहले जमीन की मांग को लेकर उसने अपने चाचा पर जानलेवा हमला कर दिया था. चाचा नसीबलाल का कहना है कि मैंने किसी तरह अपनी जान बचाई थी, नहीं तो संतोष मुझे भी मार देता.

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