कोरबा में 62 साल के ‘वनवास’ का अंत: 300 विस्थापितों को SECL देगा मुआवजा, नौकरी और बसावट पर बनी ऐतिहासिक सहमति…NV News

Share this

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और मानिकपुर कोयला खदान के विस्थापितों के बीच छह दशकों से चला आ रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। भिलाई खुर्द गांव के लगभग 300 भू-विस्थापित परिवारों के लिए यह खबर एक बड़ी जीत की तरह है, जो पिछले 62 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। प्रशासन, SECL प्रबंधन और विस्थापितों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुआवजे और पुनर्वास की मांगों पर अंतिम सहमति बन गई है, जिससे अब विकास का रास्ता साफ हो गया है।

इस समझौते के तहत, SECL प्रबंधन ने विस्थापितों को न केवल लंबित मुआवजा राशि देने का वादा किया है, बल्कि प्रभावित परिवारों के योग्य सदस्यों को नौकरी में प्राथमिकता देने पर भी अपनी मुहर लगा दी है। इसके अलावा, जिन परिवारों की जमीन खदान के लिए अधिग्रहित की गई थी, उन्हें व्यवस्थित रूप से बसाने के लिए विशेष बसावट नीति तैयार की जाएगी। 62 साल पुराने इस मामले के सुलझने से अब मानिकपुर खदान के विस्तार कार्य में आने वाली बाधाएं दूर हो गई हैं और कोयला उत्पादन में भी तेजी आने की उम्मीद है।

बैठक के दौरान यह निर्णय भी लिया गया कि विस्थापितों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समझौते की शर्तों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि किसी भी विस्थापित को दोबारा संघर्ष न करना पड़े। गौरतलब है कि मुआवजा न मिलने के कारण भिलाई खुर्द के ग्रामीण वर्षों से आंदोलनरत थे और कई बार खदान का काम भी प्रभावित हुआ था।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भू-विस्थापित नेताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह केवल धन का मामला नहीं, बल्कि उनके सम्मान और आजीविका की बहाली है। 1962 से लंबित इस जटिल मुद्दे का हल होना छत्तीसगढ़ में औद्योगिक शांति और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब प्रशासन ने दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि मुआवजा राशि का वितरण जल्द से जल्द शुरू हो सके।

Share this

You may have missed