मिलीं 500 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां: ‘श्रीमद्भागवत गीता’ सहित कई दुर्लभ हस्तलिपियों का संकलन…NV News

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NV News- छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के पेंड्रा क्षेत्र में ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत यहाँ 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘अथ श्रीमद्भागवत गीता’ सहित कई अन्य प्राचीन पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। यह खोज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस सर्वेक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न कोनों में छिपी प्राचीन, ऐतिहासिक और दुर्लभ पांडुलिपियों का पता लगाना, उनका संकलन करना और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है। पेंड्रा के पुराने घरों, मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों पर किए गए इस गहन सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञों की टीम को ऐसी हस्तलिपियां मिली हैं, जो सदियों पुरानी हैं। इनमें प्रयुक्त भाषा, लिपि और लेखन सामग्री उस कालखंड के उन्नत ज्ञान और कला को दर्शाती है।

प्राप्त पांडुलिपियों में ‘श्रीमद्भागवत गीता’ का हस्तलिखित स्वरूप सबसे अधिक चर्चा में है। जानकारों के अनुसार, इतनी पुरानी हस्तलिखित प्रति का मिलना दुर्लभ है, क्योंकि समय के साथ प्राकृतिक कारणों से ऐसी पांडुलिपियां नष्ट हो जाती हैं। इन पांडुलिपियों को अब डिजिटल रूप में संरक्षित करने और उनके संरक्षण के लिए विशेष वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करने की योजना है। इस खोज से शोधकर्ताओं को मध्यकालीन भारत के धार्मिक और सामाजिक परिवेश को समझने में नई दिशा मिलेगी।

क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और इतिहासकारों में इस खोज को लेकर भारी उत्साह है। जिला प्रशासन और ज्ञानभारतम की टीम अब इन दुर्लभ दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है ताकि उनकी सटीक आयु और ऐतिहासिक संदर्भों की पुष्टि की जा सके। यह पहल छत्तीसगढ़ की उस समृद्ध परंपरा को उजागर करती है, जहाँ सदियों से ज्ञान और अध्यात्म को लिखित रूप में संजोकर रखा गया है। संस्कृति मंत्रालय की इस कोशिश से प्रदेश की इन अनमोल धरोहरों को अब वैश्विक पहचान मिल सकेगी।

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