3,600 करोड़ बनाम 2,100 करोड़: तेलंगाना के साथ पावर बिल विवाद में कोर्ट से बाहर सुलह की तैयारी, अप्रैल तक टली सुनवाई… NV News

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छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच पिछले कई वर्षों से लंबित 3,600 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल विवाद में अब सुलह की ठोस उम्मीद जगी है। इस वित्तीय गतिरोध को दूर करने के लिए तेलंगाना के ऊर्जा मंत्री जल्द ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का दौरा करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों राज्यों के ऊर्जा विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जहाँ बकाये के भुगतान के तरीके और विवादित गणनाओं पर आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

यह विवाद तब गहराया था जब छत्तीसगढ़ ने तेलंगाना को सरप्लस बिजली की आपूर्ति की थी, लेकिन भुगतान की शर्तों और दरों को लेकर दोनों राज्यों की बिजली कंपनियों (CSPDCL और तेलंगाना डिस्कॉम) के बीच मतभेद पैदा हो गए। पूर्व में तेलंगाना ने लगभग 2,100 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति दी थी, लेकिन अब तेलंगाना की कंपनियां बिलिंग में त्रुटि का तर्क दे रही हैं। रायपुर में होने वाली यह बैठक इस ‘डेडलॉक’ को तोड़ने के लिए निर्णायक मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार के लिए यह बकाया राशि प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की पावर कंपनियां वर्तमान में वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने इस मामले को सुलझाने के लिए एक आर्बिट्रेटर (Arbitrator) भी नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार का प्रयास है कि पड़ोसी राज्य के साथ बातचीत के जरिए इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि विकास कार्यों के लिए फंड मिल सके।

तेलंगाना के ऊर्जा मंत्री के रायपुर दौरे के दौरान किस्तों में भुगतान और विलंब शुल्क (Late Payment Surcharge) पर रियायत देने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए ‘लेट पेमेंट सर्विसेज रूल’ के तहत भी इस बकाये को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। यदि यह समझौता सफल होता है, तो छत्तीसगढ़ को प्रति माह करोड़ों रुपये की किस्त मिलने लगेगी, जिससे बिजली अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।

इस बैठक के परिणामों पर पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र की नजर है, क्योंकि अंतर-राज्यीय बिजली व्यापार में यह एक बड़ा वित्तीय मामला रहा है। जानकारों का मानना है कि रायपुर में होने वाली चर्चा के बाद एक औपचारिक एमओयू (MoU) या भुगतान समझौते पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। यह कदम न केवल दोनों राज्यों के आर्थिक संबंधों को सुधारेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं देने में भी सहायक होगा।

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